• श्याम के बाहिंनु में बसि के हू, कबीर की चादर हुइ गई राधा

    श्याम के बाहिंनु में बसि के हू, कबीर की चादर हुइ गई राधा

    इस पृथ्वी पर प्रेम के “प्रथम प्रयोक्ता” और विश्व को प्रेम से साक्षात्कार योगेश्वर भगवान् श्रीकृष्ण ने कराया । प्रभु राम के सानिध्य में कुछ लोगों तक यह बात पहुंची ! वहां “प्रेमा-भक्ति” को स्थान मिला । कृष्ण के यहां “विशुद्ध प्रेम तत्त्व” को

      20.09.2018   0 Comments   6
  • क्या आप कभी सोशल मीडिया में लोगों की राय से थक जाते हैं?

    क्या आप कभी सोशल मीडिया में लोगों की राय से थक जाते हैं?

    ऐसा ही होता है।. यही कारण है कि गुणी लोग ब्लॉगिंग से प्यार करते हैं। । एक ब्लॉग का विकास इतना अधिक रोचक और सामाजिक मीडिया में बहुत ही आनन्ददायक है । अब तो जवाबदेह सभ्य समाज की धीरे धीरे एक धारणा विकसित हो रही है कि जो लोग ब्लॉग नहीं रखे हैं या किसी पत्रिका से नहीं जुड़े हैं, दिलचस्प मंचों में भाग लेने या लेख लिखने के लिए , सोच की अपनी प्रक्रिया में वास्तव में गरीब है...

      20.09.2018   0 Comments   5
  • माओ बनाम पं नेहरु

    माओ बनाम पं नेहरु

    आज लीडरशिप क्वालिटी वाली बात करते है। तो हम क्यों न कहें कि नेहरू से ज्यादा महान माओ थे। कम से कम माओ ने चीन का विस्तार तो किया, उसके भूसामरिक हितों की रक्षा तो की चाहे जो भी बलिदान देना पड़ा। तिब्बत पर कब्जा किया, शिनकियांग को कब्जे में लिया। हम कब चीन रहे? सत्ता हासिल करने के एक साल बाद ही माओ ने तिब्बत पर कब्जा किया, द्वितीय विश्व युद्ध की विजयी सेनाओं के खिलाफ जंग...

      04.08.2018   0 Comments   4
  • भीड़ द्वारा की गई पिटाई और सर्वोच्च न्यायालय

    भीड़ द्वारा की गई पिटाई और सर्वोच्च न्यायालय

    हमारे देश के सर्वोच्च न्यायालय ने देश में बढ़ रहे भीड़तन्त्र पर लगाम लगाने के लिए एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण निर्णय दिया है और देश भर की राज्य सरकारों और केन्द्रीय सरकार के लिए कुछ दिशा निर्देश दिए हैं, जिनकी जितनी भी प्रशंसा की जाए कम ही रहेगी। लोकतन्त्र में दण्ड देने का अधिकार केवल न्यायालय को होता हैं। अन्य कोई भी हो, चाहे कितना भी बड़ा अधिकारी क्यों न हो, किसी को दण्डित...

      04.08.2018   0 Comments   4
  • नारी तू नारायणी हो....

    नारी तू नारायणी हो....

    लघु कथा शाम का अंधेरा घिर रहा था। पेड़ों पर चिड़ियों का कलरव सुनाई पड़ रहा था। पंछियों के साथ- साथ थके माँदे मेहनती लोग भी घर लौट रहे थे। सदा ईमानदार रहनेवाली बस्ती की बिजली  जो ईमानदारी की तरह कभी भी गायब होते रहती थी। इस समय भी गायब ही थी, गया ईमान कब लौटे •••• लौटे या ना भी लौटे••• कौन जाने।

      04.08.2018   0 Comments   8
  • भारतीय लोकतंत्र की मज़बूती और रूसी-चीनी दाँव

    भारतीय लोकतंत्र की मज़बूती और रूसी-चीनी दाँव

    वुहान शिखरवार्ता का निहितार्थ और बेजिंग की अपनी ज़रूरत अब कोई अबूझ पहेली नहीं रही। तथा दिल्ली की कूटनीति अपने हितों की ज़रूरत के अनुसार बदलते हुए वैश्विक सामरिक संतुलन के अनुरूप अपरिवर्तनशील भी न रही।

      04.05.2018   0 Comments   4
 
 
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