अपनी -अपनी

मेरे पास काग़ज़ है
क़लम भी
हे प्रकृति
तू और मैं
उन उपक्रमों के विषय में
मैं लिखना चाहता हूँ।

हर एक सोच
जो
उसके लिए सजों रखा है
मैंने कुछ लिखा और
पन्ना फाड़ दिया ।

जबकि
मेरे पास शब्द नहीं है
व्यक्त करने के लिए
समझाने के लिए
क्यों कि
एक प्याला
समुद्र को धारण नहीं कर सकता।

बस लगता है
मेरा विचार प्रवाह
जिसे मैं लिख नहीं सकता।

(खूँटी, राँची यात्रा)

I have paper
Pen
O! Nature
Lots of feelings
About thou and me
I want to write
Concern of those
Undertaking.

Every single thought
What I have for him
I wrote some
And tore the folio
Which
I do’t have words
To express
To explain
Because
A cup can’t hold the sea.

Just feel
My thought light
I can’t write.