आओ भारत बन्द करें

वह भी एक पेट की आग ही थी
जो कचरे से खाना चुनती थी
कभी पानी से रोटी खाती थी
या फिर पानी पी-पीकर भूख मिटाती थी

व्यंजनों की भीड़ में
स्वादों के मेले में
एक एक कर चखने वालों
आयोजनों प्रयोजनों में
मेन्यू ज्यादा रखने वालों
भरी थाली अन्न फेकने वालों
शानों शौकत के दीवानों
दमकती चमकती उतावली
झूठी दुनिया में जीने वालों
अपनी अपनी जेबों को
सट्टा बाजी में लगाओ और
अपने अधिकारों को, यों
फिर से आजमाओ
इधर उधर अराजकता
जमकर फैलाओ
वह भी क्या? पेट्रोल
में लगी आग
तुम देश में सर्वत्र
आग लगाओ, जो
सिर्फ और सिर्फ
सत्ता हथियाने की
आग है…..

फिर तो
आओ भारत बन्द करें
प्रगति का चक्का मंद करें।
आओ भारत बंद करें।।
ठलुओं की फ़ौज जुटाओ
कुछ गुंडे भी मंगवाओ
हाथों में नारों की तख्ती,
गुंडों के हाथों में लाठी
जो तोड़ फोड़ भी चंद करें।
आओ भारत बंद करें।