आरक्षण

यह कैसी व्यथा है !
यह उनकी व्यथा है;
जिन्हें अरसों से आज भी
बहुत दबाया गया
जी भर कुचला गया
चहुँ दिश सरेआम अपमानित कर
अपमान का ज़हर
शदियों से पिलाया गया

आज वे भी
उठना चाहते हैं
अपने आप में
भले ही वैशाखी के सहारे
आरक्षण की, क्योंकि वे
स्वस्थ नहीं हैं, अपंग हैं
अब वे जुटना चाहते हैं
एक साथ हो कर ।

और इनका कहना है
ये हमारे हक़ खा गये
नीचे से ऊपर आकर
हमारे भविष्य को
कोख में ही
जन्म से पहले खा गये।
यह कैसी व्यथा है!
यह जिनकी व्यथा है।
यह इनकी व्यथा है।

कूप