उत्तर प्रदेश 2015

सेक्युलरी बेबसी से आजीज आ चुके है वो
उन गरीब बस्ती के लाचारों से डर लगता है
मौकापरस्ती खेल रही दैरो हरम का खेल
अवाम है दांव पे गुनहगारों से डर लगता है
अल सुबह ही खबरे लूट फसाद और दंगो के 
हमको रोज आते अखबारों से डर लगता है
मुफलिस बस्तियों मे पसरा रहता है अंधेरा 
ये देख के आनेवाले त्योहारों से डर लगता है
जरूरतों के तकाजे मे जज्बात बेच देते है 
हमे इन बाजारू किरदारों से डर लगता है
3 November 2015

फँसाद