कश्मीर के भूकम्प पर

मौत के सामने दहशतगर्द भी इंसान बन जाता है
सबको गरूर था अपनी शैतानी और दहशतगर्दी पर
ज़रा सी ज़मीं क्या हिली, औकात में आ गए
ना मज़हब, ना शोहरत और ना इबादत का फ़र्क़ था
ए मौत आज तेरे डर से आज सभी चहरे एक से से नज़र आये
न नमाज़ दिखी, न अज़ान दिखी, न दहशतगर्द शैतान दिखा
न सुन्नी दिखा, न शिया दिखा
न बहाबी दिखा, न देवबंदी दिखा
न बरेलवी दिखा, न अहमदिया दिखा
घर से भागते हुए इन्सान दिखा
28 October 2015

कश्मीर में भूकम्प में सेना द्वारा बचाव कार्य