क्रंदन

है दूर सही ,पर क्रन्दन आता है। आर्तनाद नहीं ,चित्कार नहीं। है दूर सही ,पर क्रन्दन आता है। मैं मद सता से घिरा हुआ हर रोज हमारा यही धर्म सून सून कर जिसे मैं सोता हूँ यह नित्य खेल मेरे जीवन का है दूर सही ,पर क्रन्दन आता है आर्तनाद नहीं ,चित्कार नहीं है दूर सही ,पर क्रन्दन आता है ||१|। सता की अट्टालिकाएं जब सूनी सूनी महलों के गलियारे खाली खाली तो मन आहलादित होता सुनकर ब्याभिचार पीड़िता की चित्कार सून यह सतामद का दर्शन है जिसे संजोये रखा हूँ है दूर सही ,पर क्रन्दन आता है आर्तनाद नहीं ,चित्कार नहीं है दूर सही ,पर क्रन्दन आता है ||२|| मेरे हितों पर जो करता कुठाराघात अपने दोषों को पहचान जब दुखी कोई करता आर्तनाद क्षमा उसे भी करता हूँ यह सतामद का है श्रृंगार है दूर सही ,पर क्रन्दन आता है आर्तनाद नहीं ,चित्कार नहीं है दूर सही ,पर क्रन्दन आता है ||3|| जब भूख तड़पती पेटों में जब कोई सिसकती रात-रात अपने बच्चों का देख कृशगात लाचार बनी अपने पन से हो पड़ोस का ठंडा चुल्हा बिन आंच लगे तन दहकता हो घर की गृहणी सिकुड़ सिकुड़ अपनी विवशता पर रोती हो तब यह मन विह्वल हो कहता – है दूर सही ,पर क्रन्दन आता है। आर्तनाद नहीं ,चित्कार नहीं है दूर सही ,पर क्रन्दन आता है ||४|| 25 Agust 2011 Post