गुजर जायेगा ये दौर भी

जिस नजाकत से
ये लहेरे मेरे पैरो को छू रही है....
यकीन नही आता की इन्होने ही
कई कश्तियाँ भी डूबोई होगी...!!!!!
 
ज़िन्दगी जब प्यारी थी
तब बहुत दुश्मन थे
अब मरने का शोख है
तो कोई कातिल नहीं मिलता।!!!

जमाना खिलाफ हो
क्या फर्क पङता है
मैं तो जिंदगी आज भी
अपने अंदाज मे जीता हूँ...।
 
ज़िंदगी हमनें क्या क्या न देखा
सच को मौत से गले मिलते देखा
है कौन यहाँ जो करता नहीं ग़ुनाह
फिर भी हर किसी को ख़ुदा सा देखा!!!!

वक्त बदल जाता है जिंदगी के साथ
जिंदगी बदल जाती है वक्त के साथ
वक्त भी बदलता दोस्तों के साथ
कभी दोस्त भी बदल जाते हैं
वक्त के साथ....!!!!

एक खिड़की नहीं चारों तरफ दीवार है
घुट रहा है दम यहाँ,वातावरण बीमार है
अपना चेहरा आईनें में देखकर कहने लगे
हम तो ऐसे हैं नहीं आईना बेकार है...

गुजर जायेगा ये दौर भी
ज़रा सा इत्मिनान तो रख
जब खुशिया ही नही ठहरी तेरी
तो तेरे गम की क्या औकात...!!!!
6 December 2014

पतझड़ सी ज़िंदगी