जब मन टूट जाता है

मन टूटता जाता है
और मन के साथ
शब्द,पंक्ति,भाव
सब टूटते जाते हैं
एक जीवन की भांति
कविता भी टूट जाती है
अंततः न कविता पढ़ी जाती है
न जीवन जिया जाता है......
तभी तो दुष्यन्त फूट पड़ते हैं....
“हमने  तमाम  उम्र  अकेले  सफर  किया,
हम पर किसी ख़ुदा की इनायत नहीं रही!!”