तज़रूबा

क्‍यों डरें ज़िन्‍दगी में क्‍या होगा

कुछ ना होगा तो तज़रूबा होगा

हँसती आँखों में झाँक कर देखो कोई

आँसू कहीं छुपा होगा |

18 September 2011

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