तिब्बत की सम्पदा बनी चीन की जीवन रेखा


Tibbet
आज चीन तिब्बत की सम्पूर्ण जल सम्पदा जो सम्पूर्ण मानव जगत की सम्पदा है, उसे क़ब्ज़ा कर दक्षिणी चीन,आपने हज़ारों शहरों और बेतरतीबी विकास के तहत अपने उद्योगों के जलापूर्ति करने के लिए बेपरवाह शोषण कर रहा है। तिब्बत के वनों का विनाश कर जलवायु के चक्र पर भयंकर आघात किया। जो नदियाँ मानवीय वैश्विक सम्पदा थी, वो आज चीन के पास गिरवी पड़ी है। मनुष्यता, जलवायु और प्रकृति का विध्वंस का खेल चीन सरेआम इन नदियों को बन्धक बना कर कर रहा है। भविष्य में यह खेल संसाधनों के उपभोग को लेकर दक्षिणी और उत्त्तरी चीन के लोगों के बीच संघर्ष का भयंकर कारण भी बन सकता है। सालविन / Nu Jiang (Chanese Name/Gyl Mo Ngul chu (Tinbetan) यह नदी तिब्बत की आमदो प्रदेश के आमनेमाछेंन ग्लेशियर से निकलती है \ इसके उदगम स्थान की ऊँचाई समुद्र तट से 05 हजार 173 मीटर है | इसकी लम्बाई 02 हजार 815 किलो मीटर है |इसके बेसिन का क्षेत्र 3 लाख 24 हजार वर्ग किलो मीटर है | यह तिब्बत के आमदो प्रदेश से दक्षिण पूर्व दिशा में खाम प्रदेश में आ जाति है उसके बाद चीन के यूनान प्रान्त होकर यह वर्मा में प्रवेश करती है | फिर वर्मा तथा थाईलैंड की सीमा पर बहती हुई एक तंग तथा गहरे गौर्ज से बहते हुये फिर आगे बढ़ जाती है | यहाँ प्राकृति का एक अजूबा करिश्मा देखने को मिलता है | सालविन के गौर्ज से सटे हुये समानान्तर अलग अलग गहरे गौर्जो में मेकांग, यांगत्से भी बहती है | इस गौर्ज से निकलकर सालविन म्यांमार के चौड़ी घाटी में आ जाती है और फिर आगे बंगाल की खाड़ी में मील जाती है | इस नदी पर चीन 3 बांध बना रहा है | तीनों समानान्तर नदियों (सालविन, मेकांग तथा यांगत्से) को यूनेस्को ने World Heritage Site घोषित किया हुआ है | ये वर्मा में प्रवेश करने के पहले 13 हजार फीट गहरे गौर्ज से गुजरती है | उस गौर्ज में सूर्य के दर्शन सिर्फ दोपहर में ही होता है | इसलिये यहाँ विश्व की सबसे अधिक जैव विभिन्नता पायी जाती है | सालविन पर चीन 13 बांधो की एक श्रृंखला cascated Dam बना रहा है | जो 2015 तक पूर्ण हो जाना था। इन बांधो से जितनी बिजली पैदा होगी वह Three Gorges Dam से अधिक होगी | आज के दिन Three Gorges Dam विश्व का सबसे बड़ा Hydro Electric Dam है | यहाँ यह उल्लेखनीय है कि ब्रह्मपुत्र के जल के साथ सालविन, यांगत्से तथा मेकांग का जल भी ब्रह्मपुत्र Water Diversion Scheme के अंतर्गत भेजा जायेगा | सालविन के Catchment Area में बड़े घने तथा प्राचीन वन थे | उनको चीनियों ने काट समाप्त कर दिया है | इसलिये इस नदी में Siltation की समस्या पैदा हो गयी है | ये नदी भी मेकांग, यांगत्से, सिंधु की तरह तिब्बत की चार नदियों तथा विश्व की उन दस नदियों में है जिनका जंगलों की अंधाधुंध कटाई से इनका अस्तित्व खतरा में है | Yangtze/Chang Jiang/Dri Chu   यह विश्व की तीसरी सबसे लंबी नदी है | इसकी लम्बाई 6 हजार 3 सौ 63 किलो मीटर है | जिसके प्रथम एक हजार किलो मीटर तिब्बत में है | यह एशिया की सबसे लंबी नदी है | Yangtze तथा हुआंगहों तिब्बत के आमदो प्रान्त के आमनेमाछेन ग्लेशियर से है | यह तिब्बत के आमदो, खाम तथा चीन के Sichun एवं यूनान प्रदेश होकर बहता है | यह चीन की प्राणधारा है | तिब्बत देश परम्परागत रूप से तीन प्रान्तों में विभाजित है | ये तीन प्रान्त हिन्दी में ‘त्रिप्रांत’ तथा तिब्बती में Cholka-Sum कहलाते हैं | खाम और आमदो को संयुक्त नाम Chu (River) Gang (Mountain) Dru (Six) है। खाम और आमदो प्रदेश के तिब्बती अपना परिचय Chu – Gang – Dru के रूप में देते हैं | जिसका शाब्दिक अर्थ है चार नदियों तथा छः पर्वतों वाली भूमि के निवासी | चीन के विरुद्ध जो स्वतंत्रता आन्दोलन शुरू हुआ उसकी शुरुआत खाम तथा आमदो प्रदेश से लगे चीनी क्षेत्र से ही हुई थी | क्योंकि यही दोनों क्षेत्रों की सीमा चीन की सीमा के साथ लगती थी | तिब्बती जनता का संग्राम चीन विरोधी इसी क्षेत्र से आरंभ हुआ तथा इस स्वतंत्रता आन्दोलन तथा यहाँ के स्वतंत्रता सेनानियों को Chu Gang Dru कहते हैं | उत्त्तरी चीन में पानी की कमी को पूरी करने के लिये Yangtze के पानी को पूर्वती तथा मध्यवर्ती नहरों द्वारा उत्त्तरी चीन में पहुँचाया गया है | लेकिन यह पानी उत्त्तरी चीन की पानी की समस्या के लिये प्रयाप्त नहीं था | तब तीसरी योजना बनी कि Yangtze के पानी को पश्चिमी मार्ग द्वारा भी उत्त्तरी चीन में पहुँचाया जाये | परन्तु यह योजना कार्यान्वित नहीं हो पायी। क्योंकि यह महसूस किया गया कि इतने पानी से उत्तरी चीन की सम्स्या का समाधान नहीं होगा | तब चीन के वैज्ञानिकों तथा शीर्ष नेतृत्व ने मिलकर तय किया कि उत्त्तरी चीन की पानी की समस्या के समाधान के लिये ब्रह्मपुत्र, Yangtze, मेकांग तथा सालविन इन चारो नदियों का पानी हुआंगहो (Yellow river), चाइनीज नाम Huang Ho तिब्बती नाम Machu/ अंग्रेजी नाम Yellow River कहा जाता है, द्वारा उत्त्तरी चीन तथा चीन के अन्य शुष्क प्रदेशों जैसे : मंचुरिया, इनरमंगोलिया, तथा Xinjiang में पहुँचाया जायेगा | इस परियोजना पर काम शुरू हो गया है | जिसे 2019 तक पूरा करने का संकल्प था। इस परियोजना के कार्यान्वित होने पर उत्त्तरी चीन की पानी की समस्या तो शायद हल हो जायेगी पर दक्षिणी चीन के उन क्षेत्रों को जो Yangtze, Mekang तथा Salwin पर निर्भर है, के लिये समस्या हो जायेगी | तब उत्त्तरी और दक्षिणी चीन को लेकर पानी का विवाद होगा |