तिब्बत पर कब्जा करने के चीनी सामरिक उद्देश्य

तिब्बत पर कब्जा करने के चीनी उद्देश्य सामरिक उद्देश्य चीन में जब कम्युनिष्ट सत्त्ता में आये तब 24 अक्टूबर 1949में रेडिओपेकिंग ने घोषणा कि की चीनी सेना को आदेश दिया गया है कि तिब्बत की 30 लाख जनता को साम्राज्यवादी ताकतों से मुक्त करे तथा चीन चीन की पश्चिमी सीमा को सुरक्षित करे | इससे जाहिर हुआ कि चीन का तिब्बत पर कब्जा करने का प्रथम उद्देश्य था चीन की पश्चिमी सीमा को सुरक्षित करना | (Softe Underbelly) चीन का उद्देश्य था कि विदेशी ताकतों का चीन में पिछवाड़े दरवाजे को हमेशा के लिये बंद कर देना | तिब्बत चीन का पिछवाड़े का दरवाजा है | चीनी में अपने देश चीन की Middle Kingdom / Celestial Impire की मान्यता है। चारो तरफ से जंगली / गंदे लोगों से बचाने के लिये रक्षा करना है | तिब्बत के लिये चीनी शब्द Sikang का अर्थ होता है पश्चिम खजाना जो चीन में नहीं है | जैसे : चीन की बढ़ती जनसंख्या के लिये बसने के लिये रिक्त स्थान, जंगल, वनस्पति, लकड़ी, खनिज द्रव्य, पेट्रोल, कोयला, यूरेनियम, नमक, तम्बा आदि | चीन ने अपनी सेना का आधुनिकीकरण कर दिया है और उतनी ही तेजी से यह TAR तथा Xinjiang प्रान्त में अपनी सेनाओं को अपग्रेड कर रहा है और अपनी Military force projection capability and Strategic Operational Flexibility को बढ़ा रहा है | चीन अपने आपको एशिया का मालिक समझता है | उसकी मान्यता के अनुसार एशिया में केवल एक ही देश का वर्चस्व रह सकता है और वह देश है चीन | चीन की इतनी महत्वाकांझा बढ़ गयी है कि उसने अमेरिका से कह है कि हिन्द महासागर को वह चीन के लिये छोड़ दे | हिन्द महासागर चीन का प्रभाव क्षेत्र है तथा प्रशान्त महासागर का आधा हिस्सा अपने प्रभाव क्षेत्र में रखे |

The CPEC connects Xinjiang in Northwestern region of China with Pakistan’s Gwadar port on the Arabian sea, going over the Pakistan occupied Kashmir territory of Gilgit-Baltistan and the disputed region of Balochistan.

चीन भारत का प्रभाव कम करने के लिये उसकी चारो ओर से घेरा बंदी भी कर रहा है | पाकिस्तान के बलूचिस्तान में Gawder में चीन ने अपना नौसैनिक अड्डा बना लिया है तथा इस अड्डे को उसने चीन की Xinjiang प्रान्त को काराकोरम मार्ग द्वारा जोड़ लिया है | इस मार्ग का आधुनिकीकरण भी कर दिया गया है | चीन ने Gwader के विकास के लिये 298 मिलियन डॉलर लगाया है | Gawder Port से Xinjiang की दूरी 2500+ किलो मीटर है | जब कि चीन के East Post इसकी दूरी 4500 किलोमीटर है | इस तरह पुर्णतः विकसित Gwader से Xinjiang का विकास बहुत तेजी से होगा तथा बलूचिस्तान से गैस और तेल की लाइन Gwader से पाइप लाइन द्वारा Xinjiang तथा तिब्बत भेजा जायेगा जिससे चीन की निर्भरता Persion Galf द्वारा Malaka Straits द्वारा चीन ले जाने की निर्भरता नहीं रहेगी | Persion Galf द्वारा Malaka Straits होकर चीन के जो समुद्री रास्ते पेट्रोल जाते हैं उस पर अमेरिका की निगरानी रहता है | चीन ने काराकोरम हाइवे का आधुनिककरण करने के लिये 150 मिलियन अमेरिकी डॉलर का प्रावधान किया है | तथा इसकी वर्तमान 10 मीटर की चौड़ाई को बढ़ाकर 30 मीटर कर दिया जायेगा जिससे भारी वाहन हर मौसम में जा सकेगा | Gwader को रेल मार्ग द्वारा भी चीन से जोड़ा जा रहा है | चीन को पाकिस्तानी रेल ग्रीड से जोड़ा जा रहा है | इस हाइवे द्वारा पाकिस्तान तथा चीन का मध्य एशिया की देशों से भी संबंध हो जायेगा | पाकिस्तानी सेना के गाड़ियां कज़ाख़िस्तान तथा Xinjiang तक पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से गिलगिट तथा बाल्टीस्तान होकर मध्य एशिया तक जा सकेंगे |

China pledges US$ 122 billion China UK silk road rail route
चीन 12 नया हाइवे भी बना रहा है पाकिस्तान से चीन का कजासितान, ताजिकस्तान, उजबेकिस्तान रूस होकर पुराने शिल्क रूट से जोड़ने के लिये इसे चीन का यूरोप के उन बंदरगाहों तक जो सर्दी में जमते नहीं तक इनकी पहुँच हो जायेगी | इनमें जो सबसे लंबा हाइवे होगा वह 1680 किलोमीटर लंबा होगा जो Xinjiang की राजधानी Urumyy से ताशकन्द (उज्बेकिस्तान की राजधानी) तक जायेगी | यह रोड 2010 तक इरान के mashhad तथा तुर्की के Istambul होकर यूरोप तक चली जायेगी | पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर के भारत के अधिकृत क्षेत्र का नाम बदलकर गिलगिट-बाल्टीस्तान कर दिया है | जिससे जम्मू कश्मीर के क्षेत्र को पाकिस्तानी क्षेत्र बनाया जा सके | चीन ने इसी तरह वर्मा में अपना अड्डा बनाया गया है | निस्को जमीनी रास्ता द्वारा मध्य एशिया से जोड़ा जायेगा | इस सिलसिले में कहा जाता है कि चीन का रक्षा बजट बढ़ता चला जायेगा | सन 1999 से यह 16.2 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है | 2009 में चीन का रक्षा बजट अमेरिकी डॉलर 70 विलियन था | यह अब 2017 में बढ़कर 152 विलियनअमेरिकी डॉलर हो गया है | इसके मुकाबले में भारत के रक्षा बजट मात्र 53.3 विलियन अमेरिकी डॉलर है | चीन की गतिविधि चाइनीज भारत महासागर में बढ़ती जा रही है | एक आकलन के अनुसार आज चीन के एक हजार व्यापारिक जहाज तथा मालवाहक और तेलवाहक जहाज भारत महासागर द्वारा चीन को जाते हैं | चीन अपने तेल के आयात का 60 प्रतिशत भारत महासागर होकर ले जाता है | अमेरिका अफगानिस्तान में फंसा हुआ है इसका फायदा भी चीन उठा रहा है चीन ने अमेरिका में 3.5 विलियन अमिरीकी डॉलर का investment anyak project में किया है | चीन वर्तमान में अफगानिस्तान में सबसे बड़ा invester है | चीन अफगानिस्तान में रेलवे लाइन तथा पावर प्लांट भी लगाने वाला है | आने वाले समय में अमेरिका की स्थिति के प्रभाव में कमी आती जा रही है | चीन की महत्वकांक्षा है कि वह अमेरिका से वह आगे निकल जाये | एशिया तथा अफ्रीका में बाजार के लिये, कच्चे माल के लिये, ऊर्जा के लिये उनको हथियाने के लिये चीन और भारत में होड़ हो सकती है | चीन चाहेगा कि प्राकृतिक संसाधन उर्जा के स्रोत तथा बाजार भारत के हाथ नहीं लगे | भारत एशिया में चीन का प्रतिस्पर्धी न बन सके इसके लिये चीन की चेष्टा है कि तथा आगे भी रहेगी की भारत को अपने पड़ोसी देशों में ही उलझा कर रखा जाये | चीन का आकलन है कि एशिया में अमेरिकी प्रभाव हासनोन्नुख है | अमेरिका का स्थान चीन ही ले सकता है | उर्जा का पारंपरिक (Fosssifual) दिन प्रतिदिन कम होते जा रही हैं | भविष्य में वह देश शक्तिशाली होगा जिसके कब्जे में परम्परागत उर्जा के स्रोतों के भंडार रहे या वह इसका वैकल्पिक स्रोत वह विकसित कर ले | चीन ने दोनों काम कर लिये हैं | Fosssifual के लिये वह तिब्बत के आमदो प्रान्त से tasi basin से गैस और पेट्रोल प्राप्त कर रहा है | उसने मध्य एशिया के देशों तथा इरान, इराक से भी अपने संबंध बनाकर यह सुनिश्चित कर लिया है कि इन देशों से उसे आबाधित तेल और गैस मिलता रहे | वैकल्पिक उर्जा के लिये वह बड़ी तेजी से तिब्बत से निकलने वाली अंतराष्ट्रीय नदियों पर बांध बनाकर पनबिजली पैदा कर रहा है तथा इस पनबिजली को अपने नेशनल पावर ग्रीड को जोड़कर चीन के तटवर्ती प्रदेशों उत्त्तरी चीन तथा पूर्वी चीन, मध्य चीन में अपने उधोगों को उर्जा प्रदान करता रहेगा | इस तरह आने वाले वर्षो में चीन ने पारंपरिक उर्जा तथा वैकल्पिक उर्जा के स्रोतो का मुक्कमल इंतजाम कर लिया है | जिस देश के नियंत्रण में पश्चिमी एशिया caption क्षेत्र फारस की खाड़ी का क्षेत्र होगा | वह विश्व की अर्थव्यवस्था को नियंत्रण करेगा | इस संदर्भ में यह उल्लेखनीय है कि अमेरिका अपने उर्जा का 30 प्रतिशत इसी क्षेत्र से प्राप्त करता है | विश्व का 40 प्रतिशत तेल Persian gulf आने वाले समय में भारत को अपनी अपनी उर्जा की आवश्यकता का 90 प्रतिशत की पूर्ति इन्हीं क्षेत्रों से आयात से होगी | पर्यावरणविदों तथा वैज्ञानिकों का आकलन है कि भविष्य में विश्व में जो अस्थिरता पानी की कमी तथा ग्लोबल वार्निग की कमी से होगी | चीन में Yelloy river की निचले हिस्से में साल के छः महीने सूखे रहते हैं और water Tacyle प्रतिवर्ष डेढ़ मीटर नीचे चला जाता है | बिजिंग के एक तिहाई कुएँ सूख गये हैं | इसलिए चीन Three Gorges project के साइज के डॉ और बांध यांगत्से पर बना रहा है | मेकांग, सालविन तथा ब्रह्मपुत्रा पर भी महाबांधों की श्रृंखला का निर्माण कर रहा है | 2025 तक संपूर्ण पश्चिमी एशिया, मिश्र, लिविया, टयूनेशिया, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, सिंगापुर, दक्षिणी अफ्रीका तथा भारत और चीन के कुछ भागों में जल का नितांत संकट होगा | अर्थात एक व्यक्ति को एक वर्ष में एक हजार क्वीक मीटर से कम जल प्राप्त होगा | पीने के पानी के लिये इन देशों को सिंचाई का पानी का इस्तेमाल करना पड़ेगा | फलतः कृषि कार्य के लिये सिंचाई के लिये पानी उपलब्ध नहीं होगा | जिसके फलस्वरुप खाधान्नों का आयात करना पड़ेगा | एक मतर्वा जब पर्यावरण का चक्र (Cyecological) सूख जाने पर फिर सूखा अकाल, बाढ़ तथा तूफान का अनंत चक्रों को झेलना पड़ेगा | गरीब देशों को खाधान्न, पेयजल तथा तेल का आयात करने को बाध्य होना पड़ेगा | यह काम इस्ट इंडिया कंपनी की तरह बड़ी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियाँ करेंगी और गरीब देशों को हर तरफ से शोषण होगा | अंतराष्ट्रीय तथा अंतराष्ट्रीय नदियों के जल के विभाजन को लेकर विवाद तथा युद्ध होंगे | जलापूर्ति के स्रोतों के कंट्रोल के लिये युद्ध और जल को एक राजनैतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जायेगा | water system के (target) निशाना होगा | जल के स्रोतों का प्रयोग अन्य देशों को दबाने के लिये हथियारबंद गिरोह, आतंकवादी, मल्टीनेशनल कंपनियाँ भी इस्तेमाल करेगा | अगर जल का प्रबंधन वैज्ञानिक प्रबंधन के तरीका से नहीं किया गया तो विश्व के अनेक देश सभ्यता के तरफ नष्ट हो जायेंगे | बड़ी बड़ी महानदियाँ क्षूद्र नाले में परिणत हो जायेगा | हू जिन ताओ 2007 में चीन के राष्ट्रपति बने तो उन्होंने socialism with chines characteristics की बात की | डेमोक्रोसी की भी बात की | व्यवहार में इसका अर्थ हुआ कि चीन की कम्यूनिष्ट पार्टी की 70 लाख लोग सत्ता पर एकाधिकार किये हुये हैं तथा पूरे पूंजीवादी हैं और पूंजीवाद को उन्होंने socialism का आवरण है | इस व्यवस्था के कारण अब चीन में भी असंतोष उभर रहा है और विरोध के स्वर मुखर हो रहे हैं | तिब्बत और Xinjiang में तिब्बितयों और उईगरों का नृशंसतापूर्वक कुचल दिया गया है | चीन की 93 प्रतिशत आबादी Han जाति की है | पर Han जाति के लोगों के कब्जे में 60 प्रतिशत क्षेत्र है | और 40 प्रतिशत की क्षेत्र है वह 7 प्रतिशत Myniority जैसे तिब्बती, मंगोल, यूघुर के लोगों का क्षेत्र है | माइनौरटी एरिया में चीन से लाकर लोगों को बसाया गया है | जिसके कारण तिब्बती, मंगोल, यूधुर आदि लोग अपने ही क्षेत्र में अल्पसंख्यक और वंचित हो गये हैं | सामरिक शक्ति में चीन भारत से मीलों आगे हैं : वह दिन दूर नहीं जब चीन की नेवी अपने आधुनिकीकरण के बाद अपने पनडुब्बियों के द्वारा हिंद महासागर के क्षेत्र को पूर्णतः नियंत्रित करे | चं की पनडुब्बियों Nucler Submarines है और उनके पास strategic मिसाइल हैं | चीन ने रुस से 12 मिलियन डॉलर के हथियार ख़रीदे हैं जिनमें Submarines Destroyers सुखोई-30 Figher Jet हैं | अभी हाल में चीन ने अपने anty Sattlite बेपन का सफल परीक्षण किया | पाश्चत्य देशों को भी आश्चर्यचकित कर दिया | इससे इन देशों का आशंका है कि अब चीन आर्थिक, सामरिक तथा तकनीकी की दृष्टी से काफी शसक्त हो गया है और जब चाहे अपनी मनमानी कर सकता है | चीन के साथ भारत का व्यापार बढ़ा है | यह 2.5 विलियन डॉलर से सन 2000 से बढ़कर 2017 में 70 विलियन डॉलर हो गया है | चीन अब अमेरिका के बाद भारत का second Largest Trading partner है और शीघ्र ही यह भारत का Largest Trading Patner हो जायेगा | भारत और चीन का यह आर्थिक संबंध एकतरफा है इससे फायदा चीन को है | इस व्यापार से भारत को 52 विलियन डॉलर घाटा हुआ |