दिवा एक यथार्थ

अस्तित्व को अर्थ
जीवन को सुगंध देना है
स्वयं को भूल जाना
यादों में डूब जाना
भीड़ में खो जाना
किसी के संग चले
किसी को साथ ले।

इसलिए कि मनुष्य
ठूँठ सा खड़ा न रहे
औरों से घुले मिले
चाहत यह बने कि
ऊँचाई के साथ
विस्तार भी हो
व्यवहारों में लचीला
पर विचारों में अटल ।

ज़िन्दगी
तू हमें नहीं
हम
तुझे जी जायेंगे
ऐसे
जैसे
दिवा एक स्वप्न नहीं
दिवा एक यथार्थ हो
कितने भी तू
बदल ले सवाल
हम देते रहेंगे
सभी का जबाब।