देश प्रेम बनाम आतंक

याकूब ने कहा कलाम जी से 
आज मैं भी ऊपर 
और आप भी ऊपर हो
तो फर्क क्या है ...
हम दोनों में 
डा कलाम ने मुस्कुराते हुए कहा
मुझे बुलाया गया है..
और आप को भेजा गया है
आपने जिंदगी लगा दी खूद की
मजहब की दिवार खड़ी करने में 
और हमारी जिंदगी बीत गयी
वही दीवार तोडते तोडते
देश रो पडा था
जब मैं गिरा था
वही देश मुस्कुराया था
आपको लटका हुआ देखकर
तिरंगा मेरा भी था,
और आपका भी था
पर मैंने सपने भी देखे,
तीनो रंग के
और आप लढ़ते रहे,
सिर्फ एकही रंग के लिए
देश का सर उँचा करने के लिए
मैंने मिसाईल उडाए
देश का सर नीचा झुकाने के लिए
आपने बम गिराए
मेरा काम पवित्र था
इसलिए काम करते करते गिर पडा
आपका पाप बडा था
इसलिए देश ने आपको गिराया
फासी के फंदे पे लटकाकर
मेरे लिए भारत माँ रही
और उसी कोख में फिर आऊँगा
तेरे लिए यह देश दोज़ख़ रहा 
और पड़े रहो इसी देश की ज़मीं में 
क़यामत के दिन से भी परे बाद तक 
क्यों कि अल्लाह तुझसे जन्नत कौन कहे 
दोज़ख़ भी नसीब नहीं करायेगा
31 July 2015

Dr A. P. J. kalam की ज़मीं में