पत्थर में शिवत्व

बहती हुई नदी के राह
इक पत्थर आया अंजाना
बहाव तेज़ नदी का कितना
पत्थर ने ये न जाना
जल प्रवाह के थपेड़ों ने 
तोड़ तोड़कर घिस-घिसकर 
एक नया ही जीवन दे डाला 
एक दिन यह हुआ कि
उसे निकाल बाहर किया
आत्मा का संवाद समझ
उस अन्जान को शिव मान
भगवान ही बना दिया
28 October 2015

शिव जो शून्य से परे