परिवर्तन की आस

UPA के शासन में देश की दुर्वस्था...

संसद से लेकर सड़कों तक,जंगल का कानून यहाँ।
जिसने भी आवाज उठाई ,होता है उसका खून यहाँ।
हर कुर्सी है अंधी - बहरी,हर सत्ता व्याभिचारी है।
हर कुर्सी के पाये में,पुष्पित-पलवित भ्रष्टाचारी है।
हर सरकार के साये में ,प्रफुल्लित अत्याचारी है।
हर साशन के आसन में ,पंजीकृत गद्दारी है।
लगता है अब तो भारत में ,चंडी का नर्तन होगा।
परिवर्तन तो होगा ,लेकिन.......
शिव का ताण्डव और काली का प्रचण्ड-हुंकार होगा।
22 September 2011