बलात्कार : अन्त: व्यथा

एक लघु कथानक ..... बलात्कार:अन्दर की व्यथा कथानक किसी विदेशी फ़िल्म का है। ऐंजेलीन , उम्र 14 को अभी पार कर रही थी। एक पब में घूमती है शराब पीती है और फिर दूसरे पब में चली जाती है । जिसमे उसकी सहेली ज़ेविना वेटर होती है। वहाँ वह फिर शराब पीकर डाँस करने लगती है। पब में पहले से बैठे कुछ मनचले युवकों की टोली होती है। वे भी उसके साथ डाँस करने लगते है। जब ऐंजेलीन नशे के पूर्ण आगोश में आ जाती है तो वे लड़के, जो प्रभावशाली परिवारो से भी है, उसी स्थान पर उसका बलात्कार करते है। दर्शक बस देखते रहते है। सहेली ज़ेविना किसी प्रकार पुलिस बुलाकर गंभीर घायल स्थिति में उस ऐंजेलीन को अस्पताल पहुँचा देती है। ऐंजेलीन की शिकायत पर पुलिस उन लड़को पर केस करती है। केस जब कोर्ट में जाती है तो बचाव पक्ष का वकील सिध्द कर देता है कि ऐंजेलीन ने अपनी मर्ज़ी से शराब पी, फिर अपनी मर्ज़ी से डाँस की, अपनी मर्ज़ी से लिपट लिपट कर डांस किया, और अगर यह सब बलात्कार था तो लड़की ने प्रतिरोध क्यों नही किया..? साथ ही वहाँ बहुत सारे लोग भी बैठे थे, जिनकी घटना के समय उसी पब में मौजूदगी थी वे चुप क्यों रहे....???? बचाव पक्ष के वकील की ज़ोरदार बहस के सामने ऐंजेलीन की महिला वकील रिबिका भी बोल नही पायी और अपराधी बाइज़्ज़त बरी हो गए, फिर बाद में ऐंजेलीन जिन जिन रास्ते, जिन जिन गलियों से गुज़रती वे लड़के उसे तंग करते फब्ती कसते। यह तो सम्पूर्ण एक इण्डियन कहानी रही मेट्रोपॉलिटन शहरों में रहने वाले बुद्धिजीवियों की, NGO कल्ट में जीनेवालों की, फ़िल्मी सेलिब्रिटी की, चैनलों की।21वीं सदी के प्रारम्भिक दशक में विकास- सुविधा के साथ जीने वालों की । परन्तु अब कथानक कुछ मोड़ लेता है। पीड़िता पुनः अपने वकील से मिलती है और एक बार फिर से केस चलाने की मांग करती है। महिला वकील उसे समझाती है की केस में कोई दम नही है। सेक्स के समय पीड़िता खूब नशे में थी और उसने स्वयं भी प्रतिरोध नही की। जो लोग देख रहे थे वे भी चुपचाप देखते रहे। उन्होंने भी ज़बरदस्ती करने की गवाही नही दी। फिर किन साक्ष्यों के आधार पर केस करें।वातावरण मौन हो गया। सहसा एकाएक आपने मौन को तोड़ते फिर वकील हंसती हुयी बोली "हां। दर्शको पर सार्वजनिक रूप में होते सेक्स का मूक दर्शक बने रहने का केस बनता है"। यह सुनते ही ऐंजेलीन उछल पड़ी और बोलती है "हां हां... वे देखने वाले भी उतने ही दोषी है जितना की बलात्कार करने वाले। उनपर ही केस करो। जब दर्शको पर दबाव पड़ेगा तो वे बताएंगे की यह आम सेक्स नही बल्कि बलात्कार था और चूँकि उन्होंने सम्भोग नही बलात्कार देखा था, इसलिए वे दोषी ठहराए जा सकते।" आज हम और मीडिया, तथाकथित सेक्युलर बुद्धिजीवी और सेलिब्रिटी, आधुनिक सेवव्रति NGO और मानवाधिकार संरक्षक वादी जो हर बलात्कार पर अपनी समृद्धि, स्वार्थ और चमकदमक की राजनीतिक रोटी सेनट हैं , राजनीति करते हैं - अपनी प्रसिद्धि के लिए, चर्चा में बने रहने के लिए।TRP के लिए पीड़ितों और यूसिज परिवार का सार्वजनिक रूप से प्रदर्शन करते हैं। मोमबत्तियाँ जलाकर, सोशल मीडिया में सिने पर पोस्टर चिपका कर हर दुखद घटना में चाहे वह बलात्कार ही क्यों न हो अपना धार्मिक, साम्प्रदायिक और राजनीतिक एजेंडा सेट करते हैं।-- उन सबपर केस होना चाहिए। ऐसे लोगों पर भी बलात्कारियो के साथ साथ सज़ा मिलनी चाहिए। क्योंकि 99% बलात्कार को खोल खोल कर ज़िक्र करने वाले मानसिक रूप से बलात्कारी ही होते है जिनके कारण मनोहर और सच्ची पोथियाँ धड़ाके के साथ बिका करती हैं।