बुनो एक पूरी कहानी

न जाने
क्या चाहे ये मन,
बैठा हूँ मैं
मौन,अकेला,नीरव,शांत,अचंभित सा,
सांसो का मंदन, क्रंदन सा
लय विचलित, शब्द मौन
विचार शून्य सा..!!

ज़मींदोज़ होता बीज,
महीनों रेत में कहीं,
गरबर से बादल,
फूटता अंकुर वहीँ,
उजालो के उम्मीद से,
घोर अँधेरे टूटते हैं,
चल राह को,
फिर से चुनते हैं।

सुनो तुम फ़िर लिखो एक कहानी
तुम मिला दो
सागर से दरिया का पानी
सुनो तुम फ़िर चांद तले जगो
मैं फ़िर ख्वाब का कंबल बुनुं
तुम बुनो एक पूरी कहानी।

इस जीवन की चादर में,
सांसों के ताने बाने हैं,
दुख की थोड़ी सी सलवट है,
सुख के कुछ फूल सुहाने हैं...
कुछ बैचेनी 
इक कसक
वफ़ा साथ 
निभायेगी
अंत सफ़र
पायदान आखरी
संग संग मेरे आयेगी...!!
बस यूँ ही.....

बस यों ही