भारतीय लोकतंत्र की मज़बूती और रूसी-चीनी दाँव

 वुहान शिखरवार्ता का निहितार्थ और बेजिंग की अपनी ज़रूरत अब कोई अबूझ पहेली नहीं रही। तथा दिल्ली की कूटनीति अपने हितों की ज़रूरत के अनुसार बदलते हुए वैश्विक सामरिक संतुलन के अनुरूप अपरिवर्तनशील भी न रही।

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 चीन एक बड़ा ही समझदार देश है, वो अपनी नीति को बहुत ही सोच समझकर भविष्य के लिए बनाता है, और भारत के प्रति उसकी नीति क्या हो, इसपर तो चीन ने पूरी टीम बनाई हुई है, जो सीधे जिनपिंग को रिपोर्ट करती है। भारत में अगर कांग्रेस की सरकार होती है तो चीन की नीति कुछ और होती है। भारत में अगर बीजेपी की सरकार होती है तो नीति कुछ और। चीन अब 2019 के बाद जो अपनी नीति बना रहा है नरेंद्र मोदी को देखकर, मोदी को ध्यान में रखकर ही अपनी नीतियां  बना रहा है। साफ़ है कि चीन इस बात को स्वीकार कर चुका है कि अगले चुनाव के बाद भी भारत में मोदी ही प्रधानमंत्री होंगे। इसलिए मोदी से कैसे सामना करना है, इसकी नीति तो मोदी को ध्यान में रखकर ही बनानी होगी। चीन के उप विदेश मंत्री ने स्वीकार किया है कि मोदी को देखते हुए ही चीन अपनी भविष्य की नीति निर्माण में लगा है, चीन का कहना है कि वो एशिया में शांति चाहता है, और वो भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। अभी मोदी चीन की यात्रा पर हैं। चीन मोदी की आव-भगत में जुटा हुआ है। चीन समझ चुका है कि एक ओर अमेरिका में अब डोनाल्ड ट्रम्प सत्ता में हैं जो चीन को लेकर सख्त हैं, ऊपर से भारत में अगले चुनाव के बाद भी मोदी ही प्रधानमंत्री रहने वाले हैं। इसी कारण अब चीन अपने रुख में ढीलापन लाया है। वैसे तो चीन ने पहले कोशिश की थी कि अगले चुनाव में कैसे भी भारत में राहुल गाँधी या अन्य विपक्षियों की सरकार बने, उसने भारत में पैसे भी खर्च किये, पर डाटा और भारत में मुखबिर पार्टी-कार्यकर्ताओं से प्राप्त सूचनाओं के विश्लेषण के बाद मोदी के खिलाफ चीन ने हार स्वीकार कर ली है।

  चीन ने बहुत कोशिश की, उसने कांग्रेस और वामपंथियों की भी मदद की पर भारत की जनता चट्टान की तरह मोदी के साथ है। चीन इस बात को समझ गया है, और अब चीन ने जैसे हार स्वीकार कर ली है। वह मोदी के खिलाफ भारत में अब कुछ नहीं करने वाला। चीन समझ गया है कि भारत में मोदी के खिलाफ जो भी पैसे खर्च करेगा, उसका कोई फायदा नही होगा। राहुल गाँधी में दम है नहीं और बाकि सब विपक्षी मिलकर भी मोदी का सामना नहीं कर सकेंगे। इसलिए चीन ने स्वीकार कर लिया है की 2019 के चुनाव के बाद भी भारत में मोदी ही रहेंगे प्रधानमंत्री।

 
  दूसरी तरफ एक हाई अलर्ट सुब्रमण्यम स्वामी ने जारी किया है, डॉ स्वामी की बातें काफी गंभीर होती हैं, और उनकी बातों को हलके में तो बिलकुल नहीं लिया जा सकता, वो सोनिया गाँधी को करीब से जानते हैं और सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी के खिलाफ कई खुलासे कर चुके हैं, कांग्रेस की हैसियत नहीं की डॉ स्वामी पर मानहानि का दावा करे, अब डॉ स्वामी ने क्या जारी किया है उसे देखिये

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Subramanian Swamy

@Swamy39
Desperate Congi leaders are planning to use TDK’s KGB connection to urge Putin’s Russia to influence our 2019 elections. We must be therefore on high alert

  कहा जाता है कि सोनिया गाँधी राजीव गाँधी से शादी से पहले सोवियत यूनियन की ब्रिटेन और अन्य यूरोप के देशों में KGB एजेंट थी। रुसी ख़ुफ़िया एजेंसी के लिए काम करती थी। उसके बाद वो राजीव गाँधी से शादी कर भारत आ गयी। पर सोनिया गाँधी पर KGB से रिश्तों के आरोप फिर भी लगते रहे। डॉ स्वामी ने अब कहा है कि सोनिया गाँधी अपने KGB लिंक्स के जरिये रूस के साथ मिलकर भारत में अगले साल होने वाले चुनाव को प्रभावित करने में लगी है।

  रूस यात्रा के दौरान सोनिया गाँधी भारतीय सुरक्षाकर्मी नहीं चाहती। सोनिया गाँधी को भारत सरकार ने SPG सुरक्षा दी हुई है, वह साथ-साथ विदेश भी जाती है तो भारत सरकार उस देश की सरकार से मिलकर कुछ भारतीय सुरक्षाकर्मी भी उपलब्ध करवाती है। पर सोनिया गाँधी रूस में भारतीय सुरक्षाकर्मी नहीं चाहती। साफ़ है कि भारतीय सुरक्ष्कर्मी तो भारतीय सरकार के कर्मचारी होते हैं, और अगर सोनिया गाँधी कुछ गुप्त काम करना चाहे तो भारतीय सुरक्षाकर्मी इस काम में रुकावट हैं। इसी कारण सोनिया गाँधी रूस में भारतीय सुरक्षाकर्मी नहीं चाहती, और यहाँ अब डॉ स्वामी सोनिया को लेकर हाई अलर्ट जारी कर रहे हैं। रूस एक ताकतवर देश है। वैसे आम लोग नहीं समझते पर दुनिया के ये बड़े बड़े देश, दुनिया के अलग अलग देशों में अपनी पसंद की सरकार बनवाने के लिए कई तरह के काम करते हैं। इसमें मीडिया की फंडिंग से लेकर, अराजकता फैलाना, और अलग अलग तरह के बहुत से काम। रूस एक ऐसा देश है जो की पहले भी कई देशों के चुनावों में एक्टिव रहा है। रूस पर तो ट्रम्प बनाम हिलेरी चुनावों को भी प्रभावित करने के आरोप लगे थे। कांग्रेस के रूस से सम्बन्ध जग-जाहिर हैं, भारत में पहले भी वह रूस और केजीबी की मदद से वंश की सत्ता बनवा चुकी है। रूस भारतीय राजनीति में काफी गहराई से इन्टरेस्टेड रहता है उसका कारण भारत का पिछलग्गू देश की छवि के साथ खड़े रहने से रूस की  इमेज के ताकत-वर देश की बन जाती है। रूस के कचरा हथियारों की खरीद के लिए रूस हमेशा भारत का शिकार करता रहा है। इसलिए राष्ट्रवादी-देशभक्त सरकार की जगह अब रूस-चीन मिलकर रिमोट सरकार बनवाने की साजिश कर रहे थे, जिसमे से चीन तो बिदक गया किंतु रूस अपने केजीबी एजेंटो से प्रयास जारी रखे हुए है।