मेरा अक्स

मैंने की है खुद से बाते,
पर वैसे नही।
जैसे आईने के सामने 
खड़े होकर करते है,
अपने अक्स से बाते।
मुझे नज़र नही आया ...
मेरा अक्स कभी ।
ऐसी घनी अँधेरी रातों में,
किसी अनजान साये से ज्यादा,
डरता हूँ मैं, खुद से ही ...
मैं करता हूँ बात,
अपने अक्स से,
जो दिखता ही नहीं।
आईने में देखा,
पर खुद ही था मैं ...
मेरा अक्स मिले तो,
कहूँगा उसे मैं...
पर अक्स मिलते नहीं हैं,
वो महसूस होते हैं ...
जब कुछ महसूस न हो !

हम जितना खुद को जाना
उतना दूसरों को पहचाना
जिस दिन खुद को जाना
समझो हमने सब पहचाना
खुद को बेचा आदमी ने
अपनी उम्र सारी,
बेच-बेच कर भर ली
अपनी निर्मूल्य तिजोरी
खुद तो चला गया वह
लेकर हाथ खाली
भरी तिजोरी रह गयी
देती उसको गाली
7 October 2015

मुझमें, ये अक्स मेरा हैरानी से, यूँ मुझे घूरता है शायद, कहना चाह रहा ..