मैं ही मेरा नहीं हूँ।

यूँ ताकना बन्द करो
कोई नहीं आएगा।
अन्याय और अधर्म से
स्वयं का संकल्प
केवल हमें बचाएगा।
सत्ताधीशों को
पलटने का प्रण लो।
और देखो
तुम विधाता हो
कल मेरा था
आज मेरा है
कल भी मेरा होगा।
बड़ी लंबी सोच है।
पर अजीब बात है
26 December 2015

मेरे मन की आवाज़