लोकपाल

राजनीति की चढ़ी जवानी
राजनीति की चढ़ी जवानी, सिमटी आँचल नीति की !
राजनीति की खड़ी दुपहरी , दिन ढला ओ नीति की !
ढलती शाम धुधला जब छाई, चीर लुटी लोकपाल की !
राजनीति की चढ़ी जवानी, सिमटी आँचल नीति की !!१!!
राक्षस अमात्य तब माथा पीटा, मनमोहन की पगड़ी उछली !
तब चाणक्य अट्टहास भरा, गर्जन नर्तन विपक्ष किया !
सत्ता पक्ष की बेहाई देख, तब चले अन्ना रुदन को !
सत्ताधारी घनानंद तब, इठलाते रंगमहल चला !
मैडम चली बाज़ार घोटाला, इठलाते अहमद साथ चले !
चले सिब्बल मस्ती करने, राहुल को साथ लिए !
राजनीति की चढ़ी जवानी, सिमटी आँचल नीति की !२!!
भरी दुपहरी संसद की, लोकसभा अनुत्तरित थी !
बहस बिच विल छिना झपटी, लालू की चाल निराली थी !
फाड़ विल “राजनीति” बने दुह्शासन, राज्यसभा शर्मसार हुई !
प्रणव से जन करे निवेदन, अब उनकी नव प्रणय बेला आई !
कर ले इकरार नए महफ़िल से, दे तलाक इस अभागीन की !
राजनीति की चढ़ी जवानी, सिमटी आँचल नीति की !!३!!
2 January 2012