विचारों की ही झाँकी है

भावो को शब्दो मे
यूँ ही पिरोते रहना
ये शब्दो से लिखी
तेरी खुद की कहानी है
आज एक दोहा
जैसा सुना दिया
अभी पूरी
रामायण सुनानी है
निर्भयता से लिखना,बढ़ते जाना
यहाँ तो मात्र विचारों की ही झाँकी है
एक अध्याय आज समाप्त हुआ
लेकिन अभी तो पूरी किताब बाकी है
18 December 2015

लिखना स्व को