साथ_संवाद की कूटनीति

गाँव

फुर्सत में हो तो आ जाना ....
कुछ पल उगते सूरज
संग बिता लें
फिर वहीं
उसी तीनमुहानी वाली
नीम के साये में
परसों शाम जो
रह गई थी अधूरी बातें
तुम चाहो तो
उन्हें पूरा कर लेगें।

चलो छोड़ो सब
अगर मन हो तो
चट्टी पर चल के
वहीं सुगिया की दुकान पर
बेचना को बोलकर
क्यूँ न इलायची वाली
चाय की चुस्कियाँ
खामोश बैठकर ली जाए