अनुपम मिठास

उल्लास के मृदंग बज उठे,
सुनहरी किरणों के रंग बिखरे हर तरफ।
दंग है गुलाब सूर्य की लालिमा देखकर,
ओढ़ के गुलाबी रंग सँवर गया खिलकर।

लहलहाते पीले सरसों फूल,
बजा दिया मृदंग हर मन में।
सज गए मेले शरद के,
जागी हर मन में उमंग।

कण कण प्रकृति का,
चुरा रहा सूर्य रश्मियों से रंग।
सजी है बसुंधरा जैसे,
दुल्हन ओढ़े चुनरिया सतरंग।

सुनहरी किरणों से लहरों का,
झिलमिला रहा आँचल अंतरंग।
राग मल्हार छेड़े बहती यह पवन,
जस मृग कस्तूरी पाने में मगन।

जन - मन के तन - मन में,
बज उठे उल्लास के मृदंग। 
इस अनुपम मिठास की
एक अनवरत मधुर मिलन।