असमंजस

पता नहीं क्यों
कभी कभी
वह  भी याद आते है
जिन्हें हम भूल से गये हैं।
बदलता माहौल
स्वार्थ की लताओं में लटक कर
मुँह उनके फूल से गये हैं।

पर
तुम जो खड़े हो
भविष्य की
दहलीज पर
अभी दिल पर
और दिमाग़ पर भी  
जोर मत देना।

बुनो ताने बाने
कुछ और नये पुराने
ज़िंदगी का मिटे हर भ्रम
और फिर
जब विश्वास हो मन में,
तो
जीवन को मात्र
एक खत देना।