को रुदति महीतले

तन्मय पर...
उन्मन और चुप
उस ओर वो बैठी
इस ओर वह खड़ा

कल
अगाध बारिश
अथाह जल से
उन दोनों के बीच
नदी बह पड़ी
यों कोरोना के कोहराम से
जीवन ही थम गया

मिला सके जो एक-दूसरे को
एक-दूसरे से उस नौका का
चप्पू बह गया
वैसे लॉकडाउन ही नहीं
कर्फ़्यू लग गया

अब
वो उस ओर चिरई बन
अमलतास पर बस जाना होगा
और वह ,
इस ओर अपनी देह को
एकान्त कर, अवसर को
चुनौती में बदलना होगा
कौन कहता है
कोरोना हो गया ?