ठहराव

अपने ही भार से दबा वह,
और
लोक परम्पराओं से दबी वह ,
अनवरत संघर्षरत रहने का
ठीका मिला है उन्हें
अनादि काल से
पर,
मन के तरंगों से
इंद्रधनुषी रंग में
जब भी मन आए
गरज कर छा जाने का
साधिकार है उसे
इस लोक  में।

धरती के होने
और
आसमान के होने में
स्त्री का होना
और
पुरुष का होना है।
एक वनवासी का होना  है ।

सबसे ख़तरनाक होता है
एक गूंजती हुई, शांति से भर जाना ,
न होना तड़प का,
सब कुछ सहन कर जाना
घर से निकलना काम पर
और
काम से लौटकर घर आना
भोर सुबह से उठ जाना
और
अर्द्ध रात्रि पैर सिमट कर सो जाना
सबसे ख़तरनाक होता है
हमारे सपनों का मर जाना ।

सबसे ख़तरनाक है वो घड़ी
जो चलती हुई ,
समय दिखाती है,
वो समय जो
चल तो रहा है,
पर ठहरा हुआ है
इन बेबसों के लिए
पता नही कब तक
यूँ ही ठहरा रहेगा।  .