पाकिस्तान में उभरते पहचान के संघर्ष के भू- रणनीतिक निहितार्थ

“आप सपने कैसे देख सकते हैं यदि आप का पड़ोसी ही एक बुरा स्वप्न हो”: एम. एफ मुनज्जर

 परिचय

चाणक्य ने अपने ‘मंडल सिद्धांत’ में पड़ोसियों की हमारे जीवन में स्थिति और प्रभाव को वर्षों पहले अपने मौलिक प्रज्ञा के द्वारा उनकी पूर्ण आलोचना और रुपरेखा को स्पष्ट किया था| इसमें राष्ट्र और उसके पड़ोसी की स्थिति आदि को भारत के सन्दर्भ में स्पष्ट रूप से विश्लेषित किया है| परन्तु स्वतंत्रता के उपरांत विभाजन के कारण भारत को एक ऐसा पड़ोसी मिला जिससे कि हमेशा अशांति की स्थिति बनी रही है और जो हमारी रणनीतिक और सांस्कृतिक संगम के क्षेत्र में स्थित है| यह है- इस क्षेत्र में सबसे अधिक संभावना वाले असफल राज्य पाकिस्तान। इसे फसादी या जेहादी के रूप में संदर्भित किया जाता है और आतंकवाद के मुख्य स्रोत के रूप में भी जाना जाता है, जिसने तालिबान, अलक़ायदा, आई.एस.आई.एस. और कई अन्य इस्लामी चरमपंथी समूह जैसे संगठन बना रखे हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पाकिस्तान की यात्रा एक भ्रमित राज्य के रूप में शुरू हुई।  एम.ए. जिन्ना (शिया मुस्लिम) इसके राष्ट्रपिता थे जो मुश्किल से अपने धर्म को मानते थे| इन्होंने द्विराष्ट्रीयता के सिद्धांत को अपना अधिकार माना। पाक ने किसी भी कीमत पर भारत को नीचा दिखाने हेतु ‘भ्रामक समानता के सह्लक्षण’ (पैरिटी सिंड्रोम) से ग्रसित खतरनाक ‘शून्य-संचय खेल’ ('जीरो सम' गेम) खेलते हुए एक विद्रोही रुख अपनाया। 1947 में कबायली लश्करों की घटना, बाबर, खिलजी और गजनवी जैसे उत्तेजक नामों एवं हँस के लिए पाकिस्तान और लड़कर के लेंगें हिंदुस्तान के नारों के साथ रज़ाकारों का हमला और बाद में 1965 ई. पूर्वी पाकिस्तान में घुसपैठ, कारगिल में मुजाहिद और जम्मू-कश्मीर में छद्म युद्ध ये सभी इसी क्रम में देखें जा सकते हैं| पूर्वोत्तर भारत (नॉर्थ ईस्ट) और खालिस्तान के आतंकवादियों तथा विद्रोहियों को उकसाने और समर्थन देने के साथ इसी भयावह कहानी का मंचन किया| हमारी नई पीढ़ी स्वभाववश क्षमाशील है, जो कश्मीर घाटी में वर्तमान स्थिति से दुखित हैं पर उन्हें इसके बारे में बहुत कम जानकारी है कि भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में 1952 के बाद पूर्व-पाकिस्तान और आतंकवादी समूहों के बीच क्या संबंध थे, इसे तो लगभग भूल गए हैं। अतीत में पूर्वी पाकिस्तान को चीनी सहायता से नागा उग्रवादियों के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह एवं आतंकवादी प्रशिक्षणकेंद्र के रूप में उपयोग किया गया| यह कुप्रथा 90 के दशक तक जारी रही, जिसमें बांग्लादेश के जटिल सैन्य शासकों के तहत कई अन्य समूहों को शामिल किया गया था, विशेष रूप से उल्फा को । इन सभी तथ्यों और घटनाओं का दस्तावेजीकरण (documentation) हेन जी कीसलिंग (Hein G Kiessling) द्वारा बहुप्रशंसित पुस्तक 'विश्वास, एकता, अनुशासन: पाकिस्तान का आईएसआई' में किया गया है|
भारत,  इसके विपरीत, क्षणिक प्रतिक्रियाशील और रक्षात्मक रहा है और केवल ‘बांग्लादेश मुक्ति’ के दौरान कुछ समय के लिए अस्थायी रूप से और सियाचिन में ऑपरेशन मेघदूत के दौरान रणनीतिक स्तर पर अधिक सक्रिय रहा या इस खेल पर नियंत्रण हासिल करने में सक्षम था। ऐसा प्रतीत होता है कि अब बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक के साथ बदल रहा है और जिस कारणवश ‘धारा 370 को निरस्त किया जा चूका है। भारत ने परमाणु धमकी को बंद करने के लिए कहा है, वर्तमान में परमाणु शक्ति के धौस को ध्यान में रखते हुए नए रणनीतिक तरीकों और प्रभावकारी बल की खोज की है और यहां तक कि रावलपिंडी जी.एच.क्यू (General Head Quarters, GHQ) में इसके प्रभाव को महसूस किया गया है। यह वास्तव में खुशी की बात है कि एक बार हम इस मायाजाल के वृद्धि को नियंत्रण में लाने में सक्षम है जो पाकिस्तान में ‘फॉक्स लैंड’ के नाम पर हो रहा है| इसलिए, यह जरूरी है कि हम अपनी सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि उन सभी पर भी कड़ी निगरानी रखें, जैसा कि शुरुआत के प्रसिद्ध उद्धरण में कहा गया है, कि हमारे सपने हमारे पड़ोस में होने वाली क्रियाओं द्वारा नष्ट हो सकते हैं।

पाकिस्तान में उभरते अस्मिता के संघर्ष अर्थात भ्रंश रेखाएं (फाल्ट लाइन्स)

Fault Lines in Pakistan: पाकिस्तान, जो कि 'उम्माह' (मुस्लिम भाईचारे) जैसे 'चिमेरा'(ग्रीक मिथ का एक चरित्र) का पीछा कर रहा है, जिसमें की कई गलतियां हैं और इसका प्रमुख उदाहरण है, एक धर्म, एक राष्ट्र' के सिद्धांत पर निर्मित पाकिस्तान की मूल इकाई से भिन्न भाषाई आधार पर बांग्लादेश की बड़ी शाखा की पहचान और निर्मिती| ये भ्रंश रेखाएँ केवल भाषाई क्षेत्र में ही नहीं हैं, बल्कि विभिन्न समूहों और क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ता है|

 

1. भाषाई भ्रंश रेखाएँ : पंजाबी के अनुचित और पक्षपातपूर्ण विभाजन ने मोहाजिरों के साथ भाषाई भ्रंश रेखाएँ खोल दी हैं, जिनका पाकिस्तान में लगभग 1.40 करोड़ की जनसँख्या है| के जो उर्दू बोलते हैं और विभाजन-पूर्व यूपी और बिहार में जिनकी जड़े रही है, वे आज शरणार्थी के रूप में ठगे जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप 'मोहजिर क्वामी मूवमेंट' (MQM) आया है, जिसका सिंध प्रांत, विशेषकर कराची में काफी प्रभाव है। सिंध शब्द सिन्धु से आया हुआ है, जिसका अर्थ है नदी (यह सिन्धु नदी से संदर्भित है)| सिन्ध का कुल क्षेत्रफल 140,194 वर्ग कि.मि. है और जनसंख्या 4.70 करोड़ है| सिंध में 1960 ई. 'जय सिंध' आन्दोलन शुरू हुआ जोकि एक भाषाई आन्दोलन था जो उर्दू भाषा के वर्चस्व के विरुद्ध है| पाकिस्तान गए हुए मुहाजिरों और मुस्लिमों पर इसे थोपना इस आन्दोलन के अधिकेन्द्र था| जबकि आज 'जय सिंध' आंदोलन सिंधी समाज की भाषा और संस्कृति की पहचान को बनाए रखने के लिए अपनी स्वतंत्र अस्मिता को बल दे रहा है| भाषाई भ्रंश रेखाओं ने बलूच, पश्तून, मीरपुरी (शारदा पीठ क्षेत्र) और बालटी आंदोलनों के उत्प्रेरक के रूप में भी काम किया है। यहां तक कि पंजाबी समाज के भीतर, दक्षिण पंजाब (जैश के आतंकवादियों के घर) में 'सेराइकी' बोलने वाले लोग (20 मिलियन संख्या) ने 'सेराकिस्तान' के सपने देखे हैं।

पंजाबी महफूज़ तंज़ीम आंदोलन का विचारधारा पंजाबी राष्ट्रवाद, कला, संस्कृति, साहित्य और भाषा पर आधारित है| बाबा शेख़ फ़रीद को पंजाबी राष्ट्रवाद का पिता माना जाता है| यह आंदोलन पंजाब प्रान्त के लगभग सम्पूर्ण क्षेत्र में प्रसारित हो चूका है| यह लगभग 347,190 वर्ग किमी क्षेत्र और एक सौ दस मिलियन जनसँख्या में फैला हुआ है|

तक्षशिला विश्वखविद्यालय भग्नावशेष

इसी सूबे में तक्षशिला भारतीय सभ्यता के सांस्कृतिक इतिहास का मुख्य केंद्र रहा है| जहाँ विभिन्न सभ्यताओं के इतिहास को दर्शाया गया जैसे -वैदिक-सनातन और बौद्ध आदि।

2. क्षेत्रीय भ्रंश रेखाएं : तालिबानिस्तान FATA की सात जनजातिय समूहों सहित पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा क्षेत्र पूरी तरह से केंद्र शासित प्रदेशों की बलूचों, पश्तूनों, सिंधियों, कश्मीरियों और बाल्टियों के लिए संप्रभुता की माँग के साथ पूरी तरह से अशांत हैं। आर्थिक संसाधनों के आदान-प्रदान, नदी जल के बंटवारे पर कुछ मामलों में भाषाई, आदिवासी, जातीय मतभेद और कुछ मामलों के गैर-सामंजस्य और विभेद द्वारा इन्हें पर्याप्त रूप से बल मिलता है| नतीजतन, कई क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय आवाजें लगातार जारी हैं।

बहुत ही बर्बर उपायों के बावजूद, पाकिस्तान बलोची-मुक्ति आंदोलन को समाप्त नहीं कर पाया है। पाकिस्तान द्वारा राज्य संपोषित मानवाधिकारों का हनन बलूचिस्तान मुक्ति-आंदोलन को बल प्रदान करता है| बलूच हनफ़ी सुन्नी होते हैं जिसमें ज़िक्री बलूच का एक शक्तिशाली समूह है, जो मकरान क्षेत्र में निवास करते हैं जिनकीं आबादी लगभग 7,00,000 है| ये 15वीं शताब्दी के एक इस्लामिक मसीहा 'माधी' के नूर पाक शिक्षाओं को मानते हैं| उनकी अपनी प्रार्थनाएँ हैं और रमजान के दौरान उपवास नहीं करते हैं।

बलूच राष्ट्रवाद पाकिस्तान के अस्तित्व में आने के समय से ही रहा है| बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) जैसे कई संगठन संघर्ष कर रहे हैं और उनका शीर्ष नेतृत्व निर्वासन में है। बलूचिस्तान का कुल क्षेत्रफल 347,190 वर्ग किमी और जनसंख्या लगभग 1.23 करोड़ है| नवाब अकबर खान बुगती (पूर्व प्रांतीय गवर्नर) के नेतृत्व में बलूचिस्तान में बढ़ती विद्रोह को रोकने के लिए लगभग1,00,000 पैरा-सैन्य बलों के अलावा 23,000 पाक सेना के जवान तैनात हैं। बलूच अधिक स्वायत्तता, अधिक सार्वजनिक क्षेत्र की नौकरियों और राजस्व के उच्च हिस्से की मांग कर रहें हैं| बलूचिस्तान का अत्यंत दुर्गम भू-भाग, जहाँ निर्वाह मुश्किल है, पाकिस्तान की ऊर्जा आपूर्ति और ग्वादर पोर्ट के रास्ते इसकी समुद्री सुरक्षा और व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है। बलूचिस्तान पाकिस्तान की ऊर्जा जरूरतों का 45 प्रतिशत पूरा करता है। आज, एक लंबे संघर्ष के बाद यह आंदोलन बलूच मुक्ति आंदोलन की मांग में बदल गया।

बलूच लोगों का कहना है कि ग्वादर क्षेत्र को पाकिस्तान सेना के जनरलों द्वारा विनियोजित किया गया है, जिन्होंने इसके बदले में कराची और पंजाबी व्यापारिक घरानों को बहुत उच्च दर पर बेचा गया है। 2006 के बाद, चीन की महत्वाकांक्षी CPEC परियोजना के तहत, अब यह चीन का एक प्रत्यक्ष उपनिवेश बन गया है।

के फैलते प्रभाव के कारण सुई, लोटी और पीर-कोह गैस क्षेत्रों से गैस की आपूर्ति बाधित हो गई है। भूतल परिवहन अपंग हो गया है। 2007 में, ग्वादर बंदरगाह में अब तक तीन नौसेना नावों को नष्ट कर दिया गया है। यहाँ तक कि रेलवे को केवल रात में ही परिचालन करने के लिए बाध्य होना पड़ा है। 2007 में दर्जनों जगहों पर रेलवे पटरियों को उड़ा दिया गया है और दो दर्जन से अधिक जगहों पर गैस पाइपलाइनों को निशाना बनाया गया है।

यह सर्वविदित है कि बलूच की एक बड़ी आबादी मराठी मूल की है, उनके पूर्वजों को मराठा युद्धों के बाद कैदियों और दासों के रूप में ले जाया गया था।

आ. पख्तूनिस्तान/ वजीरिस्तान (Pashtunistan) : पश्तूनों ने पाकिस्तान के अंतर्गत अपने स्थिति को कभी स्वीकार नहीं किया और स्वायत्तता और स्वतंत्रता की अपनी तीव्र इच्छा से प्रेरित हैं। सात आदिवासी क्षेत्रीय समूह (संघ प्रशासित आदिवासी (कबायली) क्षेत्र, FATA के) और इस क्षेत्र के पश्तून अपने समान जातिय और सांस्कृतिक संबंधों के आधार पर वांछित पश्तूनिस्तान या पख्तूनख्वा की मांग कर रहे हैं | इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 74,521 वर्ग किमी, और 30 लाख अफगान शरणार्थियों के साथ कुल जनसंख्या लगभग 2.40 करोड़ है। यहाँ का साक्षरता दर 17% है और केवल 10% आबादी को ही मूलभूत स्वच्छता (शौचालय) की सुविधा प्राप्त है। यह क्षेत्र वज़ीर लोगों (पठान जनजाति) द्वारा बसाया हुआ है। इस आंदोलन को वर्तमान में पश्तीनमहफूज़ मूवमेंट (PTM) द्वारा चलाया जा रहा है और यहां तक कि इसका प्रभाव कराची तक में भी है। PTM वजीरिस्तान नाम से एक संप्रभु राष्ट्र की मांग कर रहा है| वजीरिस्तान-फाटा के 13 क्षेत्रों / एजेंसियों में 105,000 पाक सेना के जवान तैनात हैं| यह क्षेत्र जो अपनी स्वतंत्र स्वतंत्र जनजातियों के लिए जाना जाता है।

वजीरिस्तान में बढ़ते संघर्ष की व्यापकता का अनुमान हताहतों की संख्या से लगाया जा सकता है, - 2005 में, 300 नागरिक और 250 सैनिक मारे गए तथा 1400 अन्य घायल हो गए| 2006 में मार्च तक 121 नागरिक, 475 सक्रिय आंदोलनकारी एवं 71 सैनिक मारे गए।

इस क्षेत्र में एक 'छोटा स्विट्जरलैंड' है जिसका नाम स्वात घाटी है, जो हिन्दुकुश पर्वत श्रृंखला के मध्य में स्थित है| स्वात घाटी पर्यटन स्थल के रूप में बहुप्रसिद्ध है| इसके साथ ही स्वात घाटी विश्व में 'बौद्ध धर्म की शिक्षा और साधना के पवित्र भूमि' हेतु सुप्रसिद्ध है| स्वात घाटी कि जनसंख्या लगभग 12 लाख के लगभग है |

इ. पाक अनाधिकृत कश्मीर / शारदा पीठ क्षेत्र : पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू और कश्मीर ने एकीकृत जम्मू और कश्मीर की इच्छा जताई है। वर्तमान में, वहाँ पर स्वतंत्रता की मांग करने वाले दलों को चुनावों में भाग लेने की अनुमति नहीं है और पूरा क्षेत्र केंद्र सरकार के प्रत्यक्ष नियंत्रण में है, यहां तक कि लोकतंत्र के बुनियादी मानदंडों तक लागू नहीं है। इस क्षेत्र का पाकिस्तान के संसद (पार्लियामेंट) में कोई भी प्रतिनिधित्व नहीं है| ये क्षेत्र जनसांख्यिकीय बदलाव से दुष्प्रभावित है और विकास से वंचित कर दिया गया है। इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 13,297 वर्ग किमी. (कश्मीर क्षेत्र 6000 वर्ग किमी. और जम्मू क्षेत्र 9000 वर्ग किमी.) है और कुल जनसंख्या लगभग 44 लाख है|

Ruins of Sharda University
सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल शारदा पीठ इसी क्षेत्र में किशनगंगा नदी (पाकिस्तान अनाधिकृत प्रशासित कश्मीर में यह नीलम के नाम से भी जाना जाता है|) के किनारे स्थित है| इसके खंडहर सीमा नियंत्रण रेखा (LOC) के पास पाकिस्तान अनाधिकृत क्षेत्र में अभी भी है| यह क्षेत्र अपने प्राचीन शारदा विश्वविद्यालय के लिए प्रसिद्ध है जिसे बौद्ध काल में एक प्रमुख संस्थान के रूप में जाना जाता था| यह गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक विश्वविद्यालय संपूर्ण एशिया में शिक्षा का मुख्य केंद्र रहा है| इसके साथ ही यह बौद्ध और हिदुओं के आध्यात्मिक शिक्षा का भी केंद्र रहा है|

बाल्टिस्तान / वलरिस्तान / शुमाली इलाकाज़ात : गिलगित-बाल्टिस्तान शिया बहुल क्षेत्र है परन्तु उसको धार्मिक निरंकुशता के साथ सुन्नी आबादी के अधीन किया जा रहा है। इसे बहुत कम स्वायत्तता और लोकतंत्र प्राप्त है। पाकिस्तान के संसद में इस क्षेत्र का कोई प्रतनिधि नहीं है| इसे विकास और शिक्षा के लाभ से भी वंचित किया गया है। भौगोलिक रूप से गिलगित-बाल्टिस्तान लद्दाख का ही हिस्सा है जों कि ट्रांस-हिमालय क्षेत्र में स्थित है| उत्तरी क्षेत्र, जोकि  वास्तव में पी.ओ.जे.के. का ही एक हिस्सा हैं, लेकिन पाकिस्तान में शामिल हैं| इसका कुल क्षेत्रफल 72,971 वर्ग किमी. और जनसंख्या 18 लाख है|

यह क्षेत्र सांस्कृतिक और भाषाई रूप से पाकिस्तान के अन्य हिस्सों से बहुत अलग है जो राज्य समर्थित सुन्नी आतंकवाद से भयंकर रूप से प्रभावित है। इस क्षेत्र में पदस्थापित सैन्यबल के उत्तरी लाइट इन्फैंट्री ईकाई प्रभाग को सुन्नी बहुल बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा इसका रि-इंजीयरिंग की जा रही है|
इस क्षेत्र में विश्व के कुछ सबसे ऊँचें पर्वत श्रृंखलाएं मौजूद हैं| इसके उत्तर में पामीर का पठार और पश्चिम में हिन्दुकुश है| यहाँ 50,000 के लगभग रॉक आर्ट्स मौजूद है जिसके लिए यह क्षेत्र प्रसिद्ध है| हुंजा और शातिल के मध्य काराकोरम उच्च-मार्ग (हाइवे) से लगा हुआ ऐसे 10 प्रधान क्षेत्र है| इस क्षेत्र की सबसे बड़ी विशेषता है यहाँ के लोगों की जीवन-अवधि विश्व के अन्य देशों के तुलना में अधिक है| इसके खनन-क्षेत्रों जैसे सोने की खानों को चीनियों को पट्टे पर दिया गया है। CPEC के हिस्से के तहत दैमेर बाशा (Daimer-Basha) जैसी मेगा हाइडल परियोजनाओं को विशाल जल-निमग्न क्षेत्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई जा रही है, फिर भी रॉयल्टी के लाभ से वंचित है| विडंबना यह है कि रायल्टी का लाभ खैबर-पख्तूनख्वा (KPK) प्रांत अभी तक प्रस्तावित है। यह सब सरदार आरिफ साहिद के नेतृत्व में 2012 में एक संप्रभु वालरिस्तान के लिए शुरू हुआ स्वतंत्रता आंदोलन इसका कारण बना, जिन्हें बाद में पाकिस्तान सेना और आईएसआई द्वारा मार दिया गया था।

 

धार्मिक-सांप्रदायिक उत्पीड़न : हिन्दू, ईसाइ, सिख, शिया और अहमदिया अल्पसंख्यक समूह को उत्पीड़न, सार्वजनिक अपमान और निन्दा के कारण धर्मांतरण किया जा रहा हैं। जिसके परिणाम स्वरूप अल्पसंख्यकों की आबादी में 205 प्रतिशत तक कमी आ गई| जबकि देश की जनसंख्या वर्ष 2000 में बढ़कर 15.60 करोड़ हो गई। जबकि किसी भी समाज में अल्पसंख्यक आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और जिनका अस्तित्व अतिवादी प्रवृत्तियों के खिलाफ एक सुरक्षा कवच होता है। इसके विपरीत उनकी युवा लड़कियों को नियमित रूप से अपहरण कर उनका धर्म परिवर्तित किया जा रहा है। इस्लाम के भीतर भी शिया और सूफ़ी, लश्कर-ए-झांगवी जैसे अतिकट्टरपंथी सलफ़ी समूहों का निशाना हैं जो बड़े पैमाने पर आतंकवाद के निशाने पर हैं। छोटे अल्पसंख्यक समूह अहमदिया, के पहचान बन चुके नोबेल पुरस्कार विजेता, अब्दुस सलाम जैसे प्रतीक को गैर इस्लामी और आधिकारिक रूप से प्रतिबंधित घोषित किया गया है।

राज्य पोषित शोषण-दमन : पाकिस्तान का सामंती समाज पंजाब-केंद्रित है, जो बलूचिस्तान के सुई गैस क्षेत्रों से गैस, जी. बी. से सोना, इसी प्रकार अन्य सभी क्षेत्रों का भरपूर दोहन करता है और यहां तक कि पानी के आवंटन तक के लिए पक्षपातपूर्ण रवैया है| पंजाब में सिंध और दक्षिण पंजाब (सेराईकस्तान) में मरुस्थलीकरण की निराशाजनक संभावनाओं को देखते हुए सिंध और दक्षिण पंजाब (सिराकिस्तान) में सिंधु नदी के ऊपर सिंधु पर कलाबाग (Kalabagh) जैसा बाँध प्रस्तावित है। यह स्थानिक पानी के तनाव की स्थिति को भारत की सिंधु जल संधि (IWT) पर बदले हुए रुख के साथ भी देखा जा सकता है। प्रस्तावित CPEC में विभिन्न परियोजनाओं के लिए प्रतिकूल-स्थितियों, दबाबों और आरोपों की कड़ी आदि को इन्हें समस्याओं के संकेत स्वरूप देख सकते है।

मानवाधिकार उल्लंघन : महिलाओं, धार्मिक अल्पसंख्यकों और ट्रांसजेंडर लोगों को हिंसक हमलों, भेदभाव और सरकारी उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, जिसमें अधिकारियों द्वारा पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने या अपराधियों को जिम्मेदार ठहराने में विफल रहते हैं। भय का माहौल कायम रखने के लिए सरकारी सुरक्षा बलों और आतंकवादी समूहों द्वारा मीडिया को गाली देना एक सतत अभ्यास है। अहमदिया समुदाय के व्यक्तियों पर ईश निंदा कानूनों के तहत लक्षित कर के मुकदमा चलाया जाता है, साथ ही पूरे पाकिस्तान में अहमदिया विरोधी कानून भी हैं।

आतंकवाद और कानून व्यवस्था हनन : आत्मघाती बम विस्फोट, सशस्त्र हमलें, तालिबानीकरण, अल-कायदा द्वारा हत्याएं और उसके सहयोगियों द्वारा धार्मिक अल्पसंख्यकों, सुरक्षा कर्मियों और राजनेताओं को लक्षित कर हत्या, जिसके परिणामस्वरूप सैकड़ों मौतें हुईं। पाकिस्तानी मानवाधिकार रक्षकों और बचाव पक्ष के वकीलों के अनुसार पाकिस्तानी सुरक्षा बल अत्याचार, निर्दोष व्यक्ति को लापता रखना, बिना किसी आरोप के हिरासत में रखना और असाधारण हत्याओं सहित गंभीर मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार होते हैं। आतंकवाद विरोधी कानून को भी राजनीतिक प्रतिशोध के एक साधन के रूप में दुरुपयोग किया जाता है। अधिकारी सैन्य अदालतों में परीक्षणों की स्वतंत्र निगरानी की अनुमति नहीं देते हैं और कई प्रतिवादियों को निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार से वंचित किया जाता है। अपहरण और गुमशुदा व्यक्तियों के सैकड़ों मामलों को एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बलूच या पश्तूनों के बयानों के आधार पर दर्ज़ किया है। अनौपचारिक अनुमानों के आधार पर इस संख्या को कई हजारों में बताया जाता है|

प्रतिक्रियात्मक रणनीतियाँ

भारत नैतिक रूप से रक्षात्मक रहा है और पाकिस्तान इसका लाभ उठा रहा है। हालाँकि, आज भारत कश्मीर में छद्म युद्ध और खालिस्तान जैसे मुद्दे को पुनर्जीवित करने के प्रयास और सिख फॉर जस्टिस - 2020 के समर्थन जैसे नए गलत कार्यों के प्रयास के खिलाफ मुहिम शुरू की है| इसलिए, आज हमारी प्रतिक्रिया अनिवार्य रूप से रणनीतियों का मूल्यांकन होना चाहिए| इनमें रणनीतियों की समग्रता - जिसमें राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक, राजनयिक और सुरक्षा जैसे सभी प्रासंगिक विषय-बिंदु (डोमेन) शामिल हैं।
इन रणनीतियों को तैयार करते समय, हमारे दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए और उन्हें मौजूदा वैश्विक परिस्थितयों में लाने के लिए स्वयंसिद्ध होना होगा। यह हमारे विस्तारित पड़ोस को विशेष ध्यान देने के लिए भी प्रासंगिक है, जिसमें OIC, ईरान, चीन और मध्य एशियाई गणराज्यों जैसे क्षेत्रीय खिलाड़ियों की संभावनाएं भी शामिल हैं।

अपरिहार्यता

प्रथमतया उभरती हुई वास्तविकताओं और स्थूल प्रवृति का समग्र दृष्टिकोण के लिए एक मंच प्रदान करने की आवश्यकता है। इसके साथ ही पाकिस्तान में भ्रंश रेखाओं (फॉल्ट लाइनों) की मैपिंग और उनके प्रभाव को समझने पर ध्यान केंद्रित करना होगा | जिसका उद्देश्य प्रतिक्रिया की रणनीतियों को विश्लेषण के साथ निर्धारित करना है | जो निम्नलिखित विषय-बिंदु पर चर्चा और विमर्श को एक व्यापक दिशा व आयाम देगा—

  1. पाकिस्तान में जातीय मुक्ति आंदोलन।
  2. पाकिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न और मानवाधिकार हनन।
  3. राजनैतिक अवपीड़न की राज्य नीति के रूप में - आतंकवाद।