पाक : मुक्ति की उभरती आवाज़ें

पाकिस्तान एक अनैतिक संरचना है। इसका जन्म न-भूगौल, न-भाषा और न-संस्कृति के आधार पर हुआ। डॉ अल्ताफ हुसैन, पाकिस्तान के प्रसिद दार्शनिक और विचारक, जो इस अनैतिक संरचना के लिए पाकिस्तान गए , बाद में वे दोयम दर्जा के अवाम रहे और खुली साँस के लिए वे भी मोहजिरस्तान की मांग करने लगे। मौलाना रहमत अली जिनके ज़ेहन में पाकिस्तान का बीज जन्मा, उनकी भी संताने मोहजिरस्तान के लिए लड़ रही हैं। पाकिस्तान से छुटकारा पाना चाहती है। अहमदिया जो पाकिस्तान बनाने में खाद-पानी देने का काम किए। आज वे भी पाकिस्तान मे गैर इस्लामिक घोषित कर दिए गए है। उनकी कौम, उनकी मस्जिदों पर खुलेआम हिंसक हमला होता है। आज उनके धर्म गुरु निर्वासित जीवन जी रहे हैं। जो लाहौर लौट नहीं सकते हैं। या यूँ कहें अहमदिया पाकिस्तान के अंदर दोयम दर्जे के नागरिक का जीवन जी रहे हैं। अब उनकी पहचान ही संकट में है। कायदे आजम जिन्ना की कौम शियाओं की हालात अमहदियो से भी बुरी है। आज शियाओं का पूरा आक़ीदा घोर संकट में जी रहा है।

पाक एक ऐसा अनैतिक पहचान है जो विभिन्न भाषाओँ, क्षेत्रीयताओ और संस्कृति का गला घोट रहा है। क्योंकि उनका गला घोंट कर ही पाकिस्तान का जन्म हुआ------ बलूचिस्तान पश्तूनीस्तान शुमाली इलाकाजात, सिंध एवं इनकी भाषाएँ- बलोच, सिंधी, पश्तून आदि। अब हमें कहने में जरा भी संकोच नहीं कि पाकिस्तान आर्थिक और सामरिक रूप से चीन का गुलाम हो चुका है। इस गुलामी कि दासता से उन भाषाई , क्षेत्रीय आवाजों की पहचान विलुप्त होनी की, मिटने की कगार पर है। इन आवाजों और उनकी पहचान-अस्मिता की मुक्ति के लिए एक वैश्विक- कूटनीतिक वातावरण का निर्माण करना आवश्यक है। पड़ोसी होने के कारण हमारा (भारत का) यह परमधर्म है। मुसलमानोँ के नाम पर आँसू बहाने वाला पाकिस्तान आज उईगर अत्याचारों पर मौन रहता है और उसके आँसू गम के नहीं ख़ुशी का इज़हार करता है। ताकि उसके खाली कटोरे मे कुछ न कुछ चीन की भिक्षा मिलती रहे।

यह आवाजे जी.एम.सईद , सरदार आरिफ शाहिद, अल्ताफ हुसैन, नवाब अकबर शहबाज खान बुगती की शहादत और मंसूर पश्तून की संघर्ष से निकली आवाजे हैं जो चीख - चीख कर पुकार रही है कि हमें मुक्ति दो और दुनियावालों इसके नैतिक समर्थन की जवाबदेही तुम्हारे हिस्से में है। यदि हम आँख बंद करेंगे तो एक न एक दिन इसका दबाब, कुप्रभाव पड़ोसी होने के नाते हम पर भी आएगा। चाहे शरणार्थी के नाते या डुबती हुई कौम के अपराधिक-कृति के नाते।​​​​​​​