मैं कवि हूँ

भावनाओं और आभासों से भरा
अव्यक्त हूँ...
सम्भावनाओं से भरा
मैं अव्यक्त हूँ....

व्यथा और पीड़ाओं से भरा
अव्यक्त हूँ.......
अत्याचारों से भरा
मैं अव्यक्त हूँ......।

अस्पृश्यता और वेदनाओं से भरा
अव्यक्त हूँ....
संवेदनाओं से भरा
मैं अव्यक्त हूँ.....।

हास्य और हँसी से भरा
अव्यक्त हूँ....
मुस्कानों से भरा
मैं अव्यक्त हूँ....।

अर्थ और शब्दों से भरा
अव्यक्त हूँ....
मुक्त विचारों से भरा
मैं अव्यक्त हूँ....।

कल्पना और कला से भरा
अव्यक्त हूँ.....
नफ़रतों के सरोकार से भरा
मैं अव्यक्त हूँ....।

सहजता और उपलब्धता के स्वभाव से भरा
अव्यक्त हूँ....
आकृतियों के आसमान से भरा
मैं अव्यक्त हूँ .....
मैं शिव हूँ........
फिर तो मैं एक कवि हूँ।