सर्दी की बारिश

कल सुबह में
सर्दी की 
पहली बारिश 
हुई धीमी 
कुछ रुक रुक कर
हल्की ही।
जैसे 
हर ख़्वाहिश
मन में 
उमंग 
जैसे धुल 
गया 
बुरा वक़्त ।

ताज़ी हुईं
पुरानी यादें 
बारिश की 
पहली बूँदें ;
अंकुरित हुए 
कुछ नए
सपने 
जो बंजर
पड़े थे।

मेरे मन में
शायद अब
पनप जाएँ
इन बूँदों से;
एक अजीब
व्याकुलता
आतुरता
धुल गया
हर बुरा पल